मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का किया आयोजन

मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का किया आयोजन

Manav Rachna International Institute of Research and Studies

Manav Rachna International Institute of Research and Studies

फरीदाबाद । दयाराम वशिष्ठ: Manav Rachna International Institute of Research and Studies: मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज के एप्लाइड साइंसेज विभाग, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने 20-21 मार्च 2025 को “एम्पोवेरिंग सस्टेनेबिलिटी थ्रू साइंस, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (ICES2ET - 2025)" अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया। यह सम्मेलन हरियाणा स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पंचकूला द्वारा वित्तपोषित था।
सम्मेलन में प्रमुख अतिथि प्रो. (डॉ.) आर.के. शर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय, निदेशक - "ग्रीन केमिस्ट्री नेटवर्क सेंटर" और "रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट (RSC) - नॉर्थ इंडिया" प्रमुख के रूप में उपस्थित रहे। सम्मानित अतिथि के रूप में डॉ. डी.एस. हूडा, पूर्व पीवीसी, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शामिल हुए। अमेरिका, सऊदी अरब और चिली के अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने सम्मेलन में अपने विचार साझा किए।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में सतत विकास और मौसम पूर्वानुमान, फज़ी सॉफ़्ट इनफॉर्मेशन मेज़र्स, वेस्ट बायोमैटेरियल्स से अपशिष्ट जल उपचार और सतत स्वास्थ्य देखभाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में 100 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 75 पत्रों को नौ तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान एक एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट जारी की गई, और चयनित शोध पत्रों को स्कोपस और वेब ऑफ साइंस (WoS) इंडेक्स जर्नल्स में प्रकाशित किया जाएगा।
MRIIRS के प्रो-वाइस चांसलर, डॉ. प्रदीप कुमार ने कहा, "यह सम्मेलन वैश्विक चुनौतियों के समाधान खोजने और सतत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।"
सम्मेलन में प्रो. (डॉ.) आर.के. शर्मा ने ग्रीन केमिस्ट्री को बढ़ावा देने और भारत में अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, जोहान्स केप्लर यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रिया के प्रो. मिलन स्टेहलीक ने डेटा साइंस और पारिस्थितिकी में इसकी भूमिका पर चर्चा की।
सम्मेलन में भारत और विदेश के शीर्ष संस्थानों के शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिससे अंतर-विषयक सहयोग को बल मिला।
MRIIRS के वाइस चांसलर, डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कहा, "शैक्षणिक संस्थान नवाचार के केंद्र होते हैं, और सतत विकास में शोध को बढ़ावा देना पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ तकनीकी प्रगति सुनिश्चित करता है।"