भगवंत मान द्वारा नरेंद्र मोदी की प्रशंसा..... यह रिश्ता क्या कहलाता है ?
Bhagwant Mann Praises Narendra Modi
Bhagwant Mann Praises Narendra Modi: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नव चयनित 700 ई टी टी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफलता को बयान करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी गुजरात से दिल्ली आए और देश के प्रधानमंत्री बने। वे स्वयं भी पंजाब के गांव से चंडीगढ़ आकर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, इसलिए आपको, जिन्हें 20 किमी के आस-पास स्टेशन मिला है, वे चिंता न करें। उन्हें 15 से 20 किमी तक स्टेशन मिलने वाले ई टी टी शिक्षकों से माफी भी मांगी। भगवंत मान द्वारा शिक्षकों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफलता की चर्चा करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
भगवंत मान की यह बात सही है कि नरेंद्र मोदी गुजरात से आकर देश के प्रधानमंत्री बने हैं, यानी उन्होंने निश्चित रूप से प्रगति की है। दूसरी ओर, उनकी अपनी आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल भी हरियाणा से दिल्ली जाकर वहां के मुख्यमंत्री बने और वे 10 साल से अधिक मुख्यमंत्री बने रहे। भगवंत मान ने इस मौके पर अपनी ही पार्टी के प्रमुख की सफलता का उल्लेख न कर नरेंद्र मोदी की सफलता का उदाहरण दिया, जिससे आमजन को लग रहा है कि भगवंत मान भारतीय जनता पार्टी से नज़दीकियां बढ़ा रहे हैं।
वैसे भी पंजाब के वर्तमान राजनीतिक हालात ऐसे हैं कि वहां किसी भी पार्टी की लोकप्रियता के ग्राफ में इज़ाफ़ा नहीं हो रहा। आम आदमी पार्टी, जो 2022 में विधानसभा में सीट जीत कर सत्ता में आई थी, लेकिन अब पहले वाली बात नहीं है, क्योंकि 2022 में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी और अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री थे। अब दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल चारों खाने चित्त हुए हैं।
ऐसे में भगवंत मान को भी 2027 में अपनी सरकार बचाने की चिंता सताने लगी है। उन्हें लग रहा है कि विधानसभा चुनाव में पंजाब में केवल आम आदमी पार्टी के बलबूते पर सरकार बनाना शायद मुश्किल हो सकता है,क्योंकि दिल्ली हारने के बाद अब खतरा बढ़ता नजर आने लगा है। भाजपा चाहेगी कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी की सरकार बने या उनके समर्थन से सरकार बने। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपना ग्राउंड तैयार करना शुरू कर दिया है। इसका उदाहरण पंजाब विधानसभा के बजट में भी देखने को मिला, जहां बजट सत्र में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया पंजाब सरकार की जमकर तारीफ करते दिखाई दिए।
इतना ही नहीं, पंजाब सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों की न केवल प्रशंसा कर रहे हैं बल्कि उनकी अगुवाई भी कर रहे हैं। पंजाब में युध नशे के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है, इसके लिए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने नशे के विरुद्ध इस मुहिम को और गति देने के लिए इसी माह 3 अप्रैल से 8 अप्रैल तक नशा मुक्ति पदयात्रा करने का कार्यक्रम बनाया है।
यह नशा मुक्ति पदयात्रा डेरा बाबा नानक से जलियांवाला बाग तक होगी । यह यात्रा "युद्ध नशंया विरुद्ध" अभियान का हिस्सा है, जिसमें राज्य सरकार और केंद्र सरकार भी सहयोग कर रही हैं ।राज्यपाल ने विधायकों, मंत्रियों और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर ड्रग्स की समस्या पर चर्चा कर पदयात्रा का आयोजन किया है।
इसके अलावा भी अन्य कार्यक्रमों में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया अपनी सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं। पूर्व राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित का पंजाब सरकार के साथ 36 का आंकड़ा बना रहा ।यह जगजाहिर भी हुआ है।
दिल्ली चुनाव के बाद अब मुख्यमंत्री भगवंत मान का भाजपा के प्रति बदला हुआ रवैया क्या कहलाता है, भविष्य में यह देखने वाली बात होगी। पूर्व में पंजाब में भाजपा कभी भी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई, दूसरी ओर भाजपा और शिरोमणि अकाली दल गठबंधन की सरकार कई बार बनी और शिरोमणि अकाली दल के सरदार प्रकाश सिंह बादल 5 बार पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। 2021 में शिरोमणि अकाली दल द्वारा किसानों के मुद्दे पर भाजपा का साथ छोड़ने के बाद पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की क्या हालत है, यह सबके सामने है।
शिरोमणि अकाली दल की यह हालत देखते हुए अब भारतीय जनता पार्टी शिरोमणि अकाली दल की ओर फिर से हाथ बढ़ाने से गुरेज कर रही है। आगामी 2027 में पंजाब जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अभी से जमीन पर काम करना शुरू कर दिया है। भाजपा की रणनीति रही है कि जिस राज्य में वे स्वयं सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं, वहां भाजपा अपने कट्टर दुश्मन राजनीतिक पार्टी से भी हाथ मिलाने से परहेज नहीं करती। अब शायद भाजपा को सबसे सरल भगवंत मान लगने लगे हैं।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा विभिन्न मौकों पर सरकार की मुक्त कंठ से तारीफ करना और भगवंत मान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात से दिल्ली पहुंचने की सफलता की सराहना करना, यह संकेत दे रहा है कि 2027 के लिए दोनों द्वारा जमीन तैयार की जा रही है।
सतीश मेहरा